21 मार्च- 2013
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होली विशेष!!
होली, यानी की रंगो का पर्व- होली का त्यौहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा के दिन पड़ता है. इस वर्ष होलिका दहन 26 मार्च और रंग 27 मार्च को खेला जाएगा. होली वैसे तो संपूर्ण भारत वर्ष में ही मौज मस्ती के माहौल में मनाई जाती है. लेकिन मेरे गृह नगर में यह पर्व पूरे एक हफ्ते तक चलता था और शायद अभी भी ऐसा होता हो.
होली का पर्व अच्छाई की बुराई पर जीत का संकेत है, इस पावन दिन सभी लोग पुराने लड़ाई झगड़े भूल कर सबको गले लगा लेते हैं...
जब त्यौहारों की बात आती है तो साथ में पारंपरिक भोजन का ज़िक्र करना बहुत ज़रूरी है. तो इस बार हम कुछ बहुत प्रसिद्ध व्यंजन जो कि ख़ासतौर पर होली पर बनाए जाते हैं उनको बनाना सीखेंगें. आजकल सभी लोग कम मीठा खाना पसंद करते हैं जिससे त्यौहार भी मनाया जाए और स्वास्थ्य भी दुरुस्त रहे..होली के अवसर पर उत्तर भारत में कांजी बननाए का चलन है. इस मौके पर तरह तरह की चाट भी बनाई जाती है. इन सबके साथ में होली के अवसर पर ठंडई भी बननाए के चलन है. अब बननाए चलो तो बहुत कुछ बननाया जा सकता है तो आप अपने स्वाद और सेहत को ध्यान में रखते हुए होली के व्यंजन बनाएँ और खूब खुशनुमा माहौल में इस पर्व का आनंद लें.....
होली आप सभी को बहुत मुबारक हो !!!!
शुचि
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दही सोंठ के बताश - गोलगप्पे, बताशे, पुच्के, पानी पूरी, यह सब नाम हैं उस एक चीज़ के जो पूरे भारत में चाट का नाम आते ही सबसे पहले जहन में आते है. उत्तर प्रदेश में गोलगप्पे, बताशे के नाम से ज़्यादा जाने जाते हैं. बाजार में सजे चाट के ठेलों पर पानी के बताशों के साथ ही साथ दही सोंठ के बताशे भी उत्तर प्रदेश की एक ख़ासियत हैं. सोंठ उत्तर प्रदेश में मीठी चटनी को कहते हैं. इन दही सोंठ के बताशों को घर पर भी बनाना बहुत आसान होता है.... |
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काजू कतली/काजू बरफी- काजू कतली जो कि काजू बरफी के नाम से भी मशहूर है एक बहुत स्वादिष्ट और सदाबहार मिठाई है. उत्तर भारतीय मिठाई की दुकानों में यह काजू कतली चाँदी के वर्क से सजी चमचमाती अलग से ही नज़र आती है. वैसे आजकल काजू रोल, पिस्ता रोल, पिस्ता बरफी, बादाम बरफी, इत्यादि कई मिठाइयाँ प्रचलन में हैं लेकिन काजू कतली का तो कोई तोड़ ही नही है. तो चलिए इस बार होली पर पाठकों की खास फरमाइश पर बनाते हैं हर दिल अज़ीज काजू बरफी.......
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कांजी के बड़े --
कांजी के बड़े उत्तर भारत में होली के अवसर पर बनने वाला बहुत की लोकप्रिय व्यंजन है. फागुनी मौसम में रंगों की बाहर के साथ यह यह चटपटे कांजी में पड़े बड़े बहुत स्वादिष्ट लगते हैं. राई को चढ़ने में तोड़ा समय लगता है तो बेहतर होगा की आप मूँग दाल के बड़े कांजी में होली के तीन चार दिन पहले की बना लें. तो फिर देर किस बात की बनाइए कांजी के बड़े और लिखना ना भूलें अपनी राय.............
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रगड़ा पेटीज - रगड़ा पेटीज, पश्चिम भारत और ख़ासकर मुंबई की बहुत ही प्रसिध चाट है. सफेद मटर से बनाया गया रगड़ा उत्तर भारत में बनने वाली मटर की चाट और आलू टिक्की से मिलता जुलता है. अब यही तो ख़ासियत है भारतवर्ष की ! एक ही चीज़ को कितने रूप में पकाया जा सकता है........….
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कुछ और बहुत पारंपरिक होली के व्यंजन -
कुछ मिठाइयाँ
कुछ और चाट आइटम
कुछ ठंडे गरम पेय
कुछ मॉकटेल
some photos for party planning and organization!