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व्रत का खाना

भारत में व्रत की परंपरा सदियों से है. व्रत कई तरह के होते हैं- कुछ व्रत ऐसे होते हैं जिनमें पानी तक नही पिया जाता है जैसे कि, करवा चौथ, सकट चौथ, तीज , इत्यादि. कुछ व्रत ऐसे होते हैं जिनमे खाली फलाहार खाया जाता है, जैसे कि- जन्माष्टमी, नवरात्रि, एकादशी वग़ैरह-वग़ैरह....

नवरात्रि के दिनों में बहुत से लोग आठ दिनों के लिए व्रत रखते हैं (पड़वा से अष्टमी), और केवल फलाहार पर ही आठों दिन रहते हैं. फलाहार का अर्थ है, फल एवं और कुछ अन्य विशिष्ट सब्जियों से बने हुए खाने. फलाहार में सेंधा नमक का इस्तेमाल होता है. नवरात्रि के नौवें दिन भगवान राम के जन्म की रस्म और पूजा (रामनवमी) के बाद ही उपवास खोला जाता है. जो लोग आठ दिनों तक व्रत नहीं रखते, वे पहले और आख़िरी दिन उपवास रख लेते हैं (यानी कि पड़वा और अष्टमी को).

अब यह आपकी श्रद्धा, और हिम्मत पर है कि आप कौन सा व्रत रखते है. और किस तरह से रखते हैं. फलाहार - फलाहार की परिभाषा भी बहुत व्यापक है - जहाँ कुछ लोग केवल हरी मिर्च को ही फलाहार मानते हैं वहीं कुछ और लोग काली और लाल मिर्च को भी व्रत में खाते हैं. ऐसा ही कुछ सब्जियों के साथ भी है- कुछ परिवारों में खाली आलू, शकरकंद, और लौकी को ही फलाहारी माना जाता है , वहीं कुछ और लोग अरबी को भी व्रत में खाते हैं. खैर.... आप श्रद्धा से व्रत रखें और बनाए फलाहारी खाना अपने परिवार की परंपरा के मुताबिक.....



कुछ हल्के फुल्के फलाहारी व्यंजन


कुछ फलाहारी ठंडे-गरम पेय


कुछ फलाहारी मिठाइयाँ


कुछ और स्वादिष्ट फलाहारी व्यंजन